कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के 4 अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 3-3 साल की जेल और 2000 रुपए का जुर्माना लगाया है। मामला 1.76 लाख रुपए की जमीन को महज 50,000 रुपए में बेचने का है, जिसमें अधिकारियों ने धोखाधड़ी और पद का दुरुपयोग किया था।
क्या था पूरा मामला?
पीड़िता: ग्राम फतेहपुर डोगरा (भोपाल) की किसान सायरा बानो ने साल 1985-86 में कुएं और पंप के लिए 18,000 रुपए का लोन लिया था।
बकाया राशि: सिर्फ 9,000 रुपए बाकी थे, लेकिन बैंक अधिकारियों ने बिना सूचना दिए उनकी 3.50 एकड़ जमीन नीलाम कर दी।
धोखाधड़ी: जमीन की असली कीमत 1.76 लाख रुपए थी, लेकिन इसे 50,000 रुपए में बेच दिया गया।
झूठे दस्तावेज: अधिकारियों ने नकली नोटशीट बनाकर संयुक्त पंजीयक से नीलामी की पुष्टि करवाई।
ये अधिकारी हुए दोषी
हरिहर प्रसाद मिश्रा (विक्रय अधिकारी)
विजेंद्र कौशल (विक्रय अधिकारी)
अशोक कुमार मुखर्जी (महाप्रबंधक)
एपीएस कुशवाहा (सहकारिता निरीक्षक)
इन पर धारा 420 (ठगी), 120-B (षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस चला।
कोर्ट का फैसला और सजा
विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने सभी आरोपियों को 3 साल की जेल और 2000-2000 रुपए का जुर्माना लगाया।
लोकायुक्त पुलिस ने जांच के बाद केस दर्ज किया था, जिसमें गवाहों के बयान और दस्तावेजी सबूत मजबूत थे।
संयुक्त पंजीयक बीएस वस्केल, जिन्होंने नीलामी की पुष्टि की थी, मामले की सुनवाई के दौरान मर चुके थे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेष लोक अभियोजक हेमलता कुशवाहा ने बताया कि यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश देता है। सरकारी अधिकारियों द्वारा गरीब किसानों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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